Birth and Death Registration Bill: अगर आप बर्थ सर्टिफिकेट या अपने किसी परिजन का डेथ सर्टिफिकेट बनवाना चाहते हैं तो अब रजिस्ट्रेशन के नियम बदल गए हैं. जानिए अब ये दोनों सर्टिफिकेट कैसे बनेंगे.
1 से 2 साल या उससे ज्यादा देरी पर बदल गए नियम
अगर किसी बच्चे का जन्म या किसी व्यक्ति की मृत्यु समय पर दर्ज नहीं कराई जाती है तो अब सर्टिफिकेट बनवाने के नियम बदल गए हैं. यानी…
- अगर बर्थ या डेथ की जानकारी एक साल के बाद, लेकिन दो साल के भीतर दी जाती है तो इसका रजिस्ट्रेशन केवल जिला मजिस्ट्रेट यानी डीएम, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट यानी एसडीएम या उनकी ओर से अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति और जांच के बाद ही हो सकेगा.
- अब अगर बर्थ और डेथ को दो साल से ज्यादा का समय बीत चुका है तो केवल फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही रजिस्ट्रेशन हो सकेगा, यानी अब दो साल से ज्यादा देरी होने पर मामला प्रशासनिक दफ्तरों से निकलकर सीधे कोर्ट के जरिए सत्यापित होगा.
सरकार ने यह बदलाव क्यों किया?
सरकार ने संसद में बताया है कि वक्त पर रजिस्ट्रेशन न कराने और सालों बाद फर्जी दस्तावेजों के जरिए पहचान पत्र बनवाने के मामलों को रोकने के लिए यह व्यवस्था लेकर आना पड़ा. दरअसल…
- कई मामलों में गलत नाम या उम्र दर्शाकर फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट बनवा लिए जाते थे, जिससे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और नागरिक पहचान में गड़बड़ी होती थी.
- डेथ रेट का सही रिकॉर्ड न होने से वोटर लिस्ट में नाम दर्ज होने से रह जाते थे, जिससे फर्जी वोटिंग की गुंजाइश बनती थी.
- देश भर में अभी लगभग 3.5 लाख रजिस्ट्रेशन यूनिट्स काम कर रही हैं. सरकार का उद्देश्य हर बच्चे और हर नागरिक का सही और पारदर्शी रिकॉर्ड रखना है.
पिछले 10 सालों में कितना सुधरा रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा?
संसद में जानकारी देते हुए सरकार ने बताया कि भारत यूनिवर्सल रजिस्ट्रेशन की ओर तेजी से बढ़ रहा है.
