दुनिया के हर धर्म और आंदोलन की एक पहचान होती है।
बौद्ध धर्म की पहचान है — बौद्ध ध्वज ( धम्म ध्वज ) ।
बौद्ध ध्वज केवल एक झंडा नहीं, बल्कि
👉 बुद्ध के ज्ञान,
👉 करुणा,
👉 शांति और
👉 मानव एकता
का प्रतीक है।
यह ध्वज विश्व भर के बौद्धों को एक सूत्र में बाँधता है।
🟦 बौद्ध ध्वज क्या है ?
बौद्ध ध्वज वह ध्वज है जो
भगवान गौतम बुद्ध के बुद्धत्व (ज्ञान प्राप्ति) का प्रतीक माना जाता है।
यह ध्वज:
बौद्ध विहारों
चैत्यभूमि
दीक्षाभूमि
बौद्ध आयोजनों
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलनों
में फहराया जाता है।
🟦 बौद्ध ध्वज का इतिहास
बौद्ध ध्वज का निर्माण 1885 ई. में हुआ।
👉 इसका प्रारूप बनाया:
कर्नल हेनरी स्टील ओल्कॉट (अमेरिका)
अनागारिक धर्मपाल (श्रीलंका)
बाद में इसे: ✔️ श्रीलंका
✔️ भारत
✔️ म्यांमार
✔️ थाईलैंड
✔️ जापान
✔️ चीन
सहित पूरी दुनिया के बौद्धों ने स्वीकार किया।
👉 1950 में विश्व बौद्ध संघ (World Fellowship of Buddhists) ने इसे आधिकारिक बौद्ध ध्वज के रूप में मान्यता दी।
🟦 बौद्ध ध्वज के छह रंग
अक्सर प्रश्न पूछा जाता है:
“अगर रंग छह हैं, तो इसे पंचशील ध्वज क्यों कहते हैं?”
इसका उत्तर नीचे स्पष्ट है 👇
🟨 1️⃣ नीला (Blue)
अर्थ: करुणा और शांति
➡️ बुद्ध की असीम करुणा का प्रतीक
🟨 2️⃣ पीला (Yellow)
अर्थ: मध्यम मार्ग
➡️ अति से दूर, संतुलित जीवन
🟨 3️⃣ लाल (Red)
अर्थ: प्रेम और शक्ति
➡️ मानवता के प्रति प्रेम
🟨 4️⃣ सफेद (White)
अर्थ: शुद्धता और मुक्ति
➡️ निर्वाण का प्रतीक
🟨 5️⃣ नारंगी (Orange)
अर्थ: त्याग और ज्ञान
➡️ भिक्षु जीवन और धम्म
🟨 6️⃣ मिश्रित रंग (Combined Colour)**
पहले पाँच रंगों का मिश्रण
➡️ संपूर्ण मानवता की एकता
🟦 फिर इसे “पंचशील ध्वज” क्यों कहा जाता है?
हालाँकि ध्वज में छह रंग हैं,
लेकिन इसे पंचशील ध्वज इसलिए कहा जाता है क्योंकि:
✔️ यह पंचशील के पाँच नैतिक सिद्धांतों का प्रतीक है
✔️ पंचशील बौद्ध जीवन की नींव हैं
✔️ ध्वज का उद्देश्य नैतिकता और अनुशासन फैलाना है
👉 छठा रंग =
पाँच शीलों से उत्पन्न मानव एकता
इसलिए:
> रंग = 6
मूल सिद्धांत = 5 (पंचशील)
🟦 बौद्ध ध्वज और पंचशील का संबंध
पंचशील ध्वज का संदेश
अहिंसा शांति और करुणा
चोरी न करना ईमानदारी
व्यभिचार न करना नैतिक जीवन
झूठ न बोलना सत्य
नशा न करना सजगता
👉 ध्वज केवल दिखाने के लिए नहीं,
जीने के लिए है।
🟦 डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और बौद्ध ध्वज
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने बौद्ध ध्वज को:
आत्मसम्मान
सामाजिक समानता
बौद्ध पहचान
का प्रतीक माना।
दीक्षाभूमि (1956) के बाद
बौद्ध ध्वज नवयान बौद्ध आंदोलन की पहचान बन गया।
🟦 आज के युग में बौद्ध ध्वज का महत्व
आज जब दुनिया:
हिंसा
युद्ध
जातिवाद
नफरत
से जूझ रही है,
तब बौद्ध ध्वज देता है:
✅ शांति का संदेश
✅ करुणा का मार्ग
✅ समानता का विचार
✅ वैश्विक बंधुत्व
🟦 निष्कर्ष
बौद्ध ध्वज केवल कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि बुद्ध धम्म की आत्मा है।
यह हमें याद दिलाता है कि:
> “शांति बाहर नहीं, हमारे आचरण में है।”
यदि हर व्यक्ति बौद्ध ध्वज के संदेश को अपनाए,
तो संसार निश्चय ही शांत बन सकता है।
🟦 References ( संदर्भ )
World Fellowship of Buddhists (1950)
अनागारिक धर्मपाल – लेख
त्रिपिटक
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर – बुद्ध और उनका धम्म
